Thursday, June 28, 2012

मंत्री वाले दिन बीते रे भैया!

अब प्रणव मुखर्जी केंद्र सरकार के लिए इतिहास की वस्तु हो जाएँगे! लेकिन संकटमोचक के विदा लेने के बाद अब उनके तमतमाए तेवर संसद में नहीं दिखेंगे. एक कठपुतली प्रधानमंत्री के सशक्त सहारे के रूप में उन्होंने अपनी भूमिका का सम्यक निर्वहन किया. राष्ट्रपति चुनाव में वे जीतें या हारें (अगर १९६९ की तरह 'आत्मा की आवाज़' पर मतदान हो तो पता नहीं क्या परिणाम हो. यह परंपरा भी तो उनकी ही पार्टी ने शुरू की थी जब अपने अधिकृत उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी को वी वी गिरि द्वारा इंदिरा गाँधी ने हरवा दिया था.) अब यह तय है कि वे प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे. जीते तो रायसीना हिल अन्यथा राजनीति की अंधी खाई में! इस तीर से सोनिया गाँधी ने अपने युवराज के लिए रास्ता और साफ कर लिया है.

Thursday, December 3, 2009

हे राम

आज दिसम्बर को विश्व विकलांग दिवस है। राजघाट गया। महात्मा के सामने सर झुकाते ही दिल का तार जैसे कहीं और से जुड़ गया, श्रद्धा से भर उठा
राजघाट जाकर
माला चढ़ाकर
चक्कर लगाकर
पिकनिक मनाकर
घर वापस आए !


Friday, September 26, 2008

दिग्भ्रमित मुस्लिम युवा

पढ़े लिखे मुस्लिम युवा जिस तरह आतंकवादी घटनाओं में शामिल होते जा रहे हैं उससे ये बात तो साफ है कि